भारत देश में हर दिन कोई न कोई त्यौहार होता है। वैसे इन दिनों सभी को 14 जनवरी का इंतज़ार है। खासतौर पर पतंग का शौक रखने वाले व्यक्तियों को। जी हाँ! 14 जनवरी मतलब "मकर संक्राति का पर्व।" आपको बता दें, पौष मास में जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है तो उस काल विशेष को ही 'संक्रांति' कहते हैं। 

Makar sankranti kyu manaate hai

दरअसल, मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जिसका निर्धारण सूर्य की गति के अनुसार होता है और मकर राशि में प्रवेश करने के कारण यह पर्व 'मकर संक्रांति' व 'देवदान पर्व' के नाम से जाना जाता है।

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है जाने कारण

बताया जाता है कि, पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए प्रतिवर्ष 55 विकला या 72 से 90 सालों में 1 अंशपीछे रह जाती है। इससे सूर्य मकर राशि में 1 दिन देरी से प्रवेश करता है। करीब 1,700 साल पहले 22 दिसंबर को मकर संक्रांति मानी जाती थी। 

इसके बाद पृथ्वी के घूमने की गति के चलते यह धीरे-धीरे दिसंबर के बजाय जनवरी में आ गई है। पं. सोमेश्वर जोशी के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी, भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। 

■ 10 रोचक तथ्य मकर संक्रांति के बारे में  जिन्हें आपको भी जानना चाहिए

यह भी कहा जाता है कि, गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थीं इसलिए मकर संक्रांति पर गंगासागर (कोलकाता, प. बंगाल) में मेला लगता है।

मकर संक्रान्ति के 3 बड़े कारण:-

यहां हम मकर संक्रांति के दिन होने वाले 3 बड़े कारणों के बारे में बता रहे है। जो कि आपको कही भी पढ़ने को नही मिलेंगे। तो जाने मकर संक्रांति के 3 बड़े कारण।

1. रातें छोटी व दिन होंगे बड़े

भारत देश उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है. मकर संक्रांति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात भारत से दूर होता है. इसी कारण यहां रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम होता है।

लेकिन मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है. अत: इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू हो जाता है।

2. शनि देव से मिलने जाते हैं भगवान भास्कर

ऐसी पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं. चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

3.संक्रांति पर भीष्म पितामह ने त्यागी थी देह

महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था. मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। 

इसलिए संक्रांति मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस दिन तिल-गुड़ के सेवन का साथ नए जनेऊ भी धारण करना चाहिए।

मकर संक्रांति का त्योहार कैसे मनाते है :-

भारतीयों का प्रमुख पर्व मकर संक्रांति अलग-अलग राज्यों, शहरों और गांवों में वहां की परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है। इसी दिन से अलग-अलग राज्यों में गंगा नदी के किनारे माघ मेला या गंगा स्नान का आयोजन किया जाता है।

कुंभ के पहले स्नान की शुरुआत भी इसी दिन से होती है।मकर संक्रांति त्योहार विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नाम से मनाया जाता है।

उत्तर प्रदेश : मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व कहा जाता है। सूर्य की पूजा की जाती है। चावल और दाल की खिचड़ी खाई और दान की जाती है।

गुजरात और राजस्थान : उत्तरायण पर्व के रूप में मनाया जाता है। पतंग उत्सव का आयोजन किया जाता है।

आंध्रप्रदेश : संक्रांति के नाम से तीन दिन का पर्व मनाया जाता है।

तमिलनाडु : किसानों का ये प्रमुख पर्व पोंगल के नाम से मनाया जाता है। घी में दाल-चावल की खिचड़ी पकाई और खिलाई जाती है।

महाराष्ट्र : लोग गजक और तिल के लड्डू खाते हैं और एक दूसरे को भेंट देकर शुभकामनाएं देते हैं।

पश्चिम बंगाल : हुगली नदी पर गंगा सागर मेले का आयोजन किया जाता है।

असम : भोगली बिहू के नाम से इस पर्व को मनाया जाता है।

पंजाब : एक दिन पूर्व लोहड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है।धूमधाम के साथ समारोहों का आयोजन किया जाता है।

क्या करें विशेष
ध्यान रहें, दान करने का अनंत गुना फल मिलता है। इस दिन तिल, कंबल, सर्दियों के वस्त्र, आंवला, धन-धान्य आदि का दान करें व नदी में स्नान करें।

यह भी पढ़ें


अगर आपको हमारी post 14 January Ko Hi Makar Sankranti Kyu Manate Hai अच्छी लगी हो और आप को post पढ़ कर समझ आ गया हो की Makar Sankranti Kyu Manate Hai. तो इस post को अपने दोस्तों के साथ social मीडिया पर share जरुर करें।