दीवाली पूजन महूर्त समय 2019 कब करे पूजा ? दीवाली क्यों मनाते है? दीवाली कब है 2019?

दीवाली हिन्दुओ का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। दीपावली के इस शुभ अवसर पर आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। आजकी पोस्ट में आज मैं आपको बताऊंगा की दीपावली क्यों मनाते है। दीवाली क्यों मनाते है।

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दीपावली के पीछे का राज या कहानी क्या है। आज की इस पोस्ट में आपके सारे सवालो के जवाब मिल जाएंगे। दीवाली क्यों मनाते है। दीवाली कब मनाते है।

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दीवाली क्यों मनाते है दीवाली की कहानी

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दीवाली भारतीय हिन्दू त्योहार है। भारत वर्ष में दीवाली को सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। दीवली के दिन लक्ष्मी पूजन किया जाता है।

दीवाली हर वर्ष हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक के माह में अमावस्या के दिन मनाई जाती है। इस मिठाई लायी और बनाई जाती है।

दीवाली का उत्सव असत्य पर सत्य की विजय के लिए मनाया जाता है। दीवाली के दिन माता लक्ष्मी के साथ गणेश जी और कुबेर जी का पूजन भी किया जाता है।

हर वर्ष दीवाली त्यौहार की तैयारी 2-3 महीने पहले ही शुरू हो जाती है। और दीवाली के लिए घरो की सफाई की जाती है।

ऐसा माना जाता है कि जहाँ सफाई होती है वही धन की देवी लक्ष्मी माता निवास करती है। इसी लिए घरो को सजाया जाता है।

और इस दिन हर घर मे मिट्टी के दीपक जलाये जाते है। और सभी घरों को रंग बिरंगी लाइट से सजाया जाता है।

दीवाली की कहानी क्या है दीवाली पूजन का सच

हर वर्ष सभी दीवाली को धूम धाम से मनाते है। और घर की औरत इस दिन माता लक्ष्मी जी का व्रत करती है। और शाम को माता की कथा (कहानी) सुनकर व्रत तोड़ती है।

ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्री राम अपनी 14 वर्ष की वनवास वरदान को पूरा करके अपने घर अयोध्या वापिस आये थे।

भगवान श्री राम के अपने घर अयोध्या वापिस आने की खुशी में अयोध्या वासियों ने अपने घरों को दीपो से सजाया था।

ऐसा भी कहा जाता है कि श्री राम एक बहुत अच्छे और नेक दिल राजा थे। जिसके पिताजी से वनवास की सजा सुनकर वो 14 वर्ष के लिए वन में चले गए थे।

उनके वनवास जाने का सभी प्रजा को बहुत दुख था। लेकिन कोई कुछ नही कर सकता था। क्योंकि राजा दशरथ का आदेश जो था।

दीवाली को लक्ष्मी पूजन क्यों करते है

दीवाली पूजन तो हर बार किया जाता है और सभी इस दिन माता लक्ष्मी का पूजन करते है। लेकिन बहुत से लोगो के दिमाग और मन मे ये सवाल जरूर आता होगा कि इस दिन लक्ष्मी का पूजन क्यों करते है।

जबकि इस दिन तो भगवान राम और माता सीता का पूजन होना चाहिए था। क्योंकि वनवास से तो ये ही वापिस आये थे। तो इसके पीछे की कहानी मैं आपको बताता हूँ।

ऐसा माना या कहाँ जाता है कि भगवान श्री राम विष्णु जी के अवतार थे। जो कि धरती पर रावण के पापों की सजा देने और राक्षस राज को खत्म करने  धरती पर आए थे।

तो जब भगवान श्री राम विष्णु जी के अवतार थे तो माता लक्ष्मी को भी भगवान के साथ आना पड़ा। और वो माता सीता के अवतार में धरती पर आयी।

और माता सीता की पूजा उनकी पवित्रा और अपने पति के प्रति पतिव्रता होने के लिए भी की जाती है। माता लक्ष्मी के इसी भव्य रूप को सीता के रूप में पूजा जाता है।

दीवाली पूजा का समय महूर्त 2019

इस बार 2019 में दीवाली पूजन 27 अकटुम्बर को किया जाएगा।

लक्ष्मी पूजन का समय - शाम को 7:15 मिनिट से 8:36 मिनिट तक है।

वृषभ काल - शाम 7 बजकर 15 मिनिट से 9:15 मिनिट तक।

प्रदोष काल - शाम 6:04 बजे से शाम 8 बजकर 37 मिनिट तक।

दीवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन अन्नकूट का प्रसाद बनाया जाता है। और शाम को गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है।

गोवर्धन पूजन महूर्त 2019 :- गोवर्धन पूजन का महूर्त 28 अकटुम्बर को शाम 3 बजकर 24 मिनिट से 5 बजकर 36 मिनिट तक रहेगा।

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सारांश
दीवाली के दिन सभी लोग पटाखे लेके आते है। और पूरी रात पटाखे फोड़ते है। और भगवान श्री राम के आने की खुशी मनाते है।

उम्मीद है अब आपके सभी सवाल दीवाली क्यों मनाते है, दीवाली पर लक्ष्मी पूजन क्यों करते है, दीवाली अमावस्या को ही क्यों मनाते है का जवाब मिल गया होगा।

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