कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाते है? जन्माष्टमी का महत्त्व क्या है??

हेलो दोस्तो free help guru की तरफ से सभी को हैप्पी कृष्ण जन्माष्टमी 2019 की हार्दिक शुभकामनाएं! आप सभी जानते है कि हर साल हम और आप कृष्ण जन्माष्ठमी मनाते आ रहे है। लेकिन क्या आप ने कभी सोचा है कि हम कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाते है, और जन्माष्ठमी के पीछे की कहानी क्या है?

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दोस्तों वैसे तो शायद सभी जानते होंगे कि कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाते है। और कृष्ण जन्माष्टमी कब मानते है? लेकिन जिन्हें नही पता उन्हें मैं आज बता देता है, हूँ कि हिन्दू कैलेन्डर के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी कृष्णा पक्ष की अष्टमी यानी के 8वें दिन मनाई जाती है।

दोस्तो आज की पोस्ट में मैं आपको कृष्ण जन्माष्ठमी के कुछ ऐसे रोचक तथ्यों के बारे में बताने वाला हूँ, जिन्हें शायद आपने अभी तक नहीँ सुना होगा। और कृष्ण जन्माष्टमी के पीछे का सच जो शायद ही आपने सुना होगा। तो जन्माष्ठमी की इस जानकारी के लिए पूरी पोस्ट को पढ़े।


जन्माष्ठमी के त्यौहार को लोग बड़े उत्साह और खुशी के साथ मनाते है। और इस दिन श्री कृष्ण के भक्त उनके लिए उपवास रखते है। और भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की पूजा करते है। भगवान श्री कृष्ण के जन्म के महान उत्सव के रूप में कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है।

Krishna Janmashtami Ki Full Jankari

गोकुलाष्टमी विष्णु भगवान के 8वें अवतार के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। भगवान श्री कृष्ण के केवल भारत देश मे ही नही बल्कि दुनिया के बहुत से देशो में भक्त है। इसीलिए कृष्ण जन्माष्टमी का ये पावन त्योहार लगभग पूरी दुनिया मे बहुत धूम धाम से मनाया जाता है।

अलग अलग जगह पर भगवान श्री कृष्ण के भक्त उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारते हैं। भगवान का प्रत्येक नाम उनके भक्तों के प्यार और सम्मान को दर्शाता है और कृष्ण के जीवन के विभिन्न चरणों का प्रतिनिधित्व करता हैं।

मनुष्यों को भगवान कृष्ण के जीवन से विभिन्न पहलुओं से जीवन का सही आचरण सीखना चाहिए। क्योंकिं भगवान श्री कृष्ण एक आज्ञाकारी बेटा, बुद्धिमान छात्र, एक रोमांटिक प्रेमी और देखभाल करने वाले पति का आदर्श उदाहरण हैं। इस दिन कान्हा के सभी पहलुओं की भक्तों द्वारा पूजा की जाती हैं।

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कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है? Why Krishna Janmashtami Celebrate in Hindi?

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भगवान कृष्ण या गोविंदा को भगवान विष्णु का आठवाँ और सबसे शक्तिशाली अवतार माना जाता है। उन्होनें धरती से राक्षसों के साम्राज्य को खत्म करने के लिए जन्म लिया था। भगवान कृष्ण देवकी और वासुदेव का आठवाँ बच्चा था।

देवकी एक क्रूर और निर्दयी राजा, कंस की बहन थी। कंस को अपनी ताकत का घमंड था। उसकी सोच थी की लोग भगवान की जगह उसकी पूजा करें। जो उसका सम्मान करने से इंकार करते थे, उसने उन निर्दोष लोगों को बेरहमी से मारना शुरू कर दिया। उसका अत्याचार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था।

एक दिन एक भविष्यवाणी हुई की कंस देवकी और वासुदेव के 8 वें बच्चे द्वारा मारा जाएगा। इसे रोकने के लिए कंस ने अपनी बहन को अपने पति के साथ कालकोठरी में बंद करवा दिया। जब भी देवकी बच्चे को जन्म देती, कंस उस बच्चे को मार देता था।

जब देवकी और वासुदेव के 8 वें बच्चे का जन्म हुआ तो भगवान विष्णु ने वासुदेव से उन्हें गोकुल ले जाने के लिए कहा जहाँ नंद और यशोदा रहते थे। जहाँ नन्द और यशोदा के एक लड़की ने जन्म लिया था। वासुदेव ने बच्चे को गोकुल पहुँचाने के लिए यमुना नदी पार की।

गोकुल पहुंचकर वासुदेव ने अपने बेटे को यशोदा की बेटी से बदल लिया और वापस जेल लौट आया। कंस ने सोचा की वह देवकी और वासुदेव का 8 वां बच्चा हैं इसलिए उसने उसे पत्थर पर फेंक कर मार दिया।

मरने के बाद वह बच्ची माँ योगमाया में प्ररिवर्तित हो गई और कंस को उनकी मृत्यु के बारे में चेतावनी दी। देवकी और वासुदेव का आठवा बच्चा भगवान कृष्ण गोकुल में बड़ा हुआ। उन्होंने वहां कई राक्षसों को मारा और कंस को मारने के लिए मथुरा लौट आया।

तब से, जन्माष्टमी या कृष्णाष्टमी और गोकुलाष्टमी भगवान् कृष्ण या गोविंदा के जन्मदिन के रूप मनाया जाता हैं। और इस दिन गोकुल में भव्य दरबार सजाया जाता है। और जन्माष्ठमी का त्यौहार मनाया जाता है।

जन्माष्टमी पर क्या-क्या पकवान बनते है

बाल गोपाल मक्खन, दही और दूध से बनी चीजों को खाना पसंद करते थे। इसलिए बाल गोपाल का स्वागत करने के लिए विभिन्न मीठे व्यंजन बनाये जाते है। जो कि मक्खन और दही से बनाये जाते है।

इन पकवानों को उन्हें भोग के रूप में प्रस्तुत किया जाता हैं। उसके बाद परिवार द्वारा प्रसाद के रूप में खाया जाता हैं। इन पकवानों को बाल गोपाल या गोविंदा के पसंदीदा माना जाता हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी कब है 2019 में और क्या महूर्त है

इस साल 2019 में कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार शनिवार 24 अगस्त 2019 को मनाया जाएगा। और खुशीयां बाटी जाएगी।

कृष्णा जन्माष्टमी पूजा के मुहूर्त के बारे हम बात करे तो कृष्ण जन्माष्टमी पूजा का शुभ समय 23 अगस्त को रात 12.08 बजे से 1.04 बजे तक है।

कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव कैसे बनाये

इस दिन लोग जन्माष्टमी के एक दिन पहले कि शाम से ही उपवास करते है जिसे सप्तमी कहा जाता है। कृष्ण भक्त रात भर जागते रहते है और भगवान कृष्ण का सम्मान करने के लिए गाने भजन गाते हैं।

मध्यरात्रि 12 बजे, दूध से मूर्ति को नहलाते है और सुंदर कपड़े, गहने पहनाते है फिर पूजा के लिए पालना में रखा जाता हैं। देवताओं को मिठाई भेंट की जाती है और फिर भक्तों के बीच बांटी जाती हैं।

भगवान् कृष्ण के भक्त कृष्ण भजनों के साथ नृत्य करते हैं।साथ ही वे कृष्ण झांकी का एक अति उत्कृष्ट प्रदर्शन आयोजित करते है।

जो रासलीला को एक विशाल तरीके से दर्शाता हैं। जन्माष्टमी की सबसे लोकप्रिय गतिविधि दही हांड़ी का रिवाज हैं। इस परंपरा को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

मथुरा, वृंदावन और गोकुल में कृष्ण जन्माष्टमी

मथुरा भगवान् कृष्ण का जन्मस्थान है। क्योंकि वहीँ पर राजा कंस की कैद में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। वृंदावन और गोकुल वो जगहें है जहाँ कृष्ण ने अपना बचपन बिताया था।

भगवान कृष्ण का जन्मस्थान होने के नाते मथुरा में जन्माष्टमी का एक भव्य उत्सव होता है। मथुरा का ये उत्सव पूरे देश से पर्यटकों को आकर्षित करता हैं। युवा लड़के, लड़कियां रासलीला का अभिनय करते हैं। रासलीला राधा और गोपी के साथ भगवान कृष्ण के रोमांटिक और प्रेमपूर्ण पक्ष को दर्शाती हैं।

जन्माष्ठमी के दिन मथुरा के मुख्य मंदर द्वारकाधीश मंदिर को फूलों और रंग बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। इस मंदिर में युवाओं के द्वारा रासलीला का प्रोग्राम किया जाता है। जो कि सारे देश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है।

वृन्दावन में भी जन्माष्ठमी का भव्य उत्सव बनाया जाता है।
वृन्दावन वह जगह है जहाँ नंद बाबा और यशोदा रहते थे, जहाँ कान्हा को उसके पिता वासुदेव ने जन्म के बाद एक सुरक्षित हिरासत में छोड़ दिया था। गोकुल में भी भगवान कृष्ण के कुछ प्रसिद्ध मंदिर है।

उत्तर भारत के अन्य स्थानों जैसे हरियाणा, दिल्ली और पंजाब में भी जन्माष्टमी को पूरे उत्साह के मनाया जाता हैं। लोग पूरे दिन उपवास करते है कृष्ण की भक्ति में प्रार्थना करते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व Importance of Krishna Janmashtami

जन्माष्टमी का अपना महत्व है। भगवान विष्णु ने भगवत गीता नामक प्राचीन काल की एक पवित्र पुस्तक में कहा है की जब समाज में बुराई का प्रभाव बढ़ेगा और धर्म की गिरावट होगी तो मैं इस दुनिया में पुनर्जन्म लूंगा और बुराई को खत्म करने और अच्छाई का साथ देने के लिए भी पुनर्जन्म लूंगा।

इस त्यौहार का मुख्य महत्व नेक नियत को प्रोत्साहित करने और बुरी इच्छा को हतोत्साहित करने में निहित हैं। एकता के लिए भी कृष्ण जन्माष्टमी मनाया जाता हैं। यह पवित्र त्यौहार लोगों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देता है इसलिए जन्माष्टमी को एकता का प्रतीक माना जाता हैं।

उम्मीद है कि आपको इस पोस्ट से Shree krishna janmahstami, गोकुलष्टमी के त्यौहार के बारे में अधिक से अधिक जानकारी मिली होगी। यदि आपको इस पोस्ट की जानकारी उपयोगी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करें।

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